Friday, 16 October 2015

औरत का स्वरुप

सुना जब किसी से
औरत का रुप नहीं..
..
थोड़ा लड़खड़ाया
और घबराया..
...
देव प्रचंड ले अवतार
अर्धनारिश्वर जगमगाया..
....
हुई कुँठा देख उस व्यक्ति को
मैं थोड़ा झुँझलाया...
...
औरत का रुप स्वरुप
ना पहचाने जो..
वो कैसे आज तक
जगममाया..
...
है आग की तपिश
प्रचंड बाला..
....
क्या है तेरे मन में
जो ना भरपाया..
...
भस्म हो जाएगा
चंडी है वो
मूर्ख अभी ना समझ पाया...
...
सुना नहीं
जगमग ज्योत जलाते रहो
नाम उसी का गाते रहो..
...
इंसान है तू
इंसानियत ना समझ पाया..
...
जिन्न_दिनेश..
सर्व अधिकार सुरक्षित एवं पूर्व प्रकाशित..


यूवा शक्ति को प्रेरित करने हेतू मेरी कोशिश भर..

No comments: